महात्मा गान्धी और राष्ट्रभाषा
राष्ट्रभाषा एक और लिपियाँ दो, गान्धीजी के भाषा विषयक विचार में यह अजब उलटबाँसी दिखती है, पर सच्चाई यह है
पूरा पढ़ें...राष्ट्रभाषा एक और लिपियाँ दो, गान्धीजी के भाषा विषयक विचार में यह अजब उलटबाँसी दिखती है, पर सच्चाई यह है
पूरा पढ़ें...जो लोग सरलीकरण के तर्क पर हिन्दी भाषा में वर्तनी के प्रति उच्छृङ्खल व्यवहार के आदी हैं उन्हें याद रखना
पूरा पढ़ें...‘खानापूरी’ और ‘पेशाबघर’ जैसे शब्द हम अकसर प्रयोग करते हैं। ‘खाना’ और ‘पेशाब’ फ़ारसी के हैं तो ‘पूरी’ और ‘घर’
पूरा पढ़ें...(मैं क्यों हिन्दी की क़ीमत पर भी देवनागरी लिपि को बचाने की बात करता हूँ? मैं क्यों हिन्दी में पञ्चमाक्षरों
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