जब गालियाँ भाषा बनने लगें
जन्तर-मन्तर पर छात्र आन्दोलन में सुनाई दी गालियों से उठे सवाल से शुरू होकर यह लेख बदलती भाषा, अपशब्दों के बढ़ते चलन और भाषा के साथ बदलते सामाजिक संस्कारों की पड़ताल करता है।
पूरा पढ़ें...जन्तर-मन्तर पर छात्र आन्दोलन में सुनाई दी गालियों से उठे सवाल से शुरू होकर यह लेख बदलती भाषा, अपशब्दों के बढ़ते चलन और भाषा के साथ बदलते सामाजिक संस्कारों की पड़ताल करता है।
पूरा पढ़ें...मुहावरे अकेले कमरे में नहीं बनते। वे चौपालों में बनते हैं। खेतों में बनते हैं। साझे दुःख-सुख में बनते हैं।
पूरा पढ़ें...अरब की संस्कृति में नारी, स्त्री या महिला एक जननाङ्ग भर है। वैसे ‘जननाङ्ग’ भी नहीं कहना चाहिए, क्योंकि संस्कृत
पूरा पढ़ें...फ़िल्मवाले कितने भी समझदार बन जाएँ, पर अन्त में अपनी मूर्खता दिखा ही देते हैं। फ़िल्म के अन्त में लिखा
पूरा पढ़ें...सही कहूँ तो दो-तीन साल पहले जब से मेरा ध्यान जस्टिस गवई पर गया है, तब से ही मुझे उनका
पूरा पढ़ें...पाकिस्तान ने अपने लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया के सहारे पूरी दुनिया में झूठ फैलाने का जैसा अभियान चलाया है,
पूरा पढ़ें...इस्लाम शुरुआत से ही युद्धरत रहा है, तो इसमें धर्म-परिवर्तन के लिए सहमति से आगे बढ़कर मारकूट और छल-छद्म का
पूरा पढ़ें...आज़ादी के बाद जिन मुसलमानों ने मुसलमानों की तुलना में हिन्दुओं के साथ ज़्यादा सुरक्षित महसूस करते हुए पाकिस्तान जाने
पूरा पढ़ें...महान् स्वतन्त्रता सेनानी और समाजवाद के प्रतिबद्ध वक्ता डॉ. राममनोहर लोहिया का जन्म 23 मार्च, 1910 को इसी अकबरपुर क़स्बे
पूरा पढ़ें...ऐसे लोग बड़ी सङ्ख्या में हैं, जो सवेरे-सवेरे ख़ाली पेट गुनगुने पानी में शहद और नींबू का रस मिलाकर पीते
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