अपनी हिन्दी

अपनी हिन्दीधर्म-संस्कृति-समाज

जब गालियाँ भाषा बनने लगें

जन्तर-मन्तर पर छात्र आन्दोलन में सुनाई दी गालियों से उठे सवाल से शुरू होकर यह लेख बदलती भाषा, अपशब्दों के बढ़ते चलन और भाषा के साथ बदलते सामाजिक संस्कारों की पड़ताल करता है।

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अपनी हिन्दीधर्म-संस्कृति-समाज

स्त्री को ‘औरत’ बोलना बन्द कीजिए!

अरब की संस्कृति में नारी, स्त्री या महिला एक जननाङ्ग भर है। वैसे ‘जननाङ्ग’ भी नहीं कहना चाहिए, क्योंकि संस्कृत

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उर्दू से आया तो हिन्दी में ‘बवाल’ हो गया

‘वबाल’ का अर्थ है—विपत्ति, आपत्ति, मुसीबत, जञ्जाल, झञ्झट। इसी के साथ फ़ारसी का जान मिलकर ‘वबालेजान’ बना है; यानी प्राणों

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