सातों दिन भगवान के…
आपने अपने आपको नहीं बनाया, आपकी ज़िन्दगी की डोर आपके हाथों में नहीं है, आपमें तो दरअसल इस बात तक
पूरा पढ़ें...आपने अपने आपको नहीं बनाया, आपकी ज़िन्दगी की डोर आपके हाथों में नहीं है, आपमें तो दरअसल इस बात तक
पूरा पढ़ें...आज़ादी बचाओ आन्दोलन जिस समाज-व्यवस्था की बात करता रहा है, उस पर गम्भीरता से सोचा जाना चाहिए। अभी वक़्त है,
पूरा पढ़ें...राष्ट्रभाषा एक और लिपियाँ दो, गान्धीजी के भाषा विषयक विचार में यह अजब उलटबाँसी दिखती है, पर सच्चाई यह है
पूरा पढ़ें...उस समय फ़ोन पर स्वामी रामदेव जी से मैंने बस यही कहा—‘‘स्वामी जी, याद रखने के लिए आपका आभारी हूँ,
पूरा पढ़ें...दिल्ली में रहते हुए ही मुझे रामेश्वरम से कुछ सूचनाएँ मिलीं तो 9 फरवरी, 2007 को मैंने एक लम्बा लेख
पूरा पढ़ें...सन् 1997 में जब यह किताब छपी तो इसने पूरी दुनिया में धूम मचा दी। लाखों लोगों ने इसे पढ़ा
पूरा पढ़ें...कभी-कभी कुछ किताबें ऐसी भी निगाह में आ जाती हैं, जिन्हें पढ़ने के बाद लगता है कि तारीफ़ ही नहीं,
पूरा पढ़ें...जो लोग सरलीकरण के तर्क पर हिन्दी भाषा में वर्तनी के प्रति उच्छृङ्खल व्यवहार के आदी हैं उन्हें याद रखना
पूरा पढ़ें...‘खानापूरी’ और ‘पेशाबघर’ जैसे शब्द हम अकसर प्रयोग करते हैं। ‘खाना’ और ‘पेशाब’ फ़ारसी के हैं तो ‘पूरी’ और ‘घर’
पूरा पढ़ें...प्रश्न तकनीक का नहीं है, प्रश्न तो तकनीक के पीछे काम करने वाले भाव का है। जड़ और भौतिक तकनीक
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