एक असहाय स्त्री की ख़ातिर देश की जनता के नाम…
मैंने अपनी वेदना व्यक्त की है तो सिर्फ़ इसलिए कि जिन भी हाथों में यह खुला ख़त पहुँचे, वे ग़लतफ़हमियों
पूरा पढ़ें...मैंने अपनी वेदना व्यक्त की है तो सिर्फ़ इसलिए कि जिन भी हाथों में यह खुला ख़त पहुँचे, वे ग़लतफ़हमियों
पूरा पढ़ें...बिना उनसे मिले विश्वास करना कठिन था कि वे इतने अहङ्कार शून्य भला कैसे हो सकते थे। मुझे भी दस-बारह
पूरा पढ़ें...जिस समय देवनागरी का जन्म हुआ, उस समय भारत की स्थिति दुनिया के अन्य देशों की तरह कबीलाई नहीं थी।
पूरा पढ़ें...महात्मा गान्धी का नाम आते ही अहिंसा शब्द बरबस याद आ जाता है; और, इसी के साथ अहिंसा के पक्ष-विपक्ष
पूरा पढ़ें...बिलकुल ज़रूरी नहीं है कि होम्योपैथी देर से परिणाम दे। सिरदर्द, पेटदर्द वग़ैरह में मेरा तरीक़ा यह है कि मैं
पूरा पढ़ें...सङ्गीत का इस्तेमाल सेहत के लिए कैसे हो सकता है, इसके लिए यह लेख पढ़ सकते हैं। 27 जनवरी, 2017
पूरा पढ़ें...फिलहाल, यहाँ उन कुछ सामान्य उपायों का वर्णन किया जा रहा है, जिन्होंने लाखों लोगों को महामारी से बचाने में
पूरा पढ़ें...बदलते समय में पत्रकारिता के व्यावसायिक चेहरे को नकारने की ज़रूरत नहीं है, पर मीडिया संस्थानों को स्मरण रखना चाहिए
पूरा पढ़ें...सच—एक इस दुनिया में सबसे बड़ी चीज़ है भाग्य। आपने ख़ुद को नहीं बनाया, न मैंने ख़ुद को बनाया…असल में
पूरा पढ़ें...स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि उर्दू से जैसी हमारी नज़दीकी है, उसे देखते हुए इसकी शब्दावली का
पूरा पढ़ें...