दृश्य-संस्कृति के बहाने दिलचस्प सभ्यता-विमर्श
लेखक की चिन्ता इस बात की है कि भारतीय समाज-विज्ञान में विचारधाराओं का वर्चस्व रहा है, जिसके चलते राजनीति के
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पूरा पढ़ें...सन् 1997 में जब यह किताब छपी तो इसने पूरी दुनिया में धूम मचा दी। लाखों लोगों ने इसे पढ़ा
पूरा पढ़ें...कभी-कभी कुछ किताबें ऐसी भी निगाह में आ जाती हैं, जिन्हें पढ़ने के बाद लगता है कि तारीफ़ ही नहीं,
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