टीके से जान बची या जान पर बन आई?
वैक्सीनेशन सर्टीफ़िकेट से मोदी जी की तसवीर आनन-फ़ानन में हटा दी गई है, पर इससे वे कोई साफ़-पाक नहीं हो
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पूरा पढ़ें...यह मैं कोई हवा में नहीं कह रहा हूँ। ज़मीन पर रहता हूँ और ज़मीनी लोगों की बातें सुनता-समझता हूँ।
पूरा पढ़ें...ड्रग माफ़ियाओं का शातिरपना इसी समझा जा सकता है कि इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) को एलोपैथी फ़ार्मा कम्पनियों के भाँति-भाँति
पूरा पढ़ें...बात तो तब होती, जबकि सत्ता में शामिल कुछ नेताओं-मन्त्रियों पर भी ईडी की तलवार लटकती दिख रही होती। योगी
पूरा पढ़ें...अपने हिसाब से अपनी नज़र में वे ठीक ही कर रहे थे। उन्हें सिखाया गया था कि इस्लामबहिः लोगों को
पूरा पढ़ें...‘वबाल’ का अर्थ है—विपत्ति, आपत्ति, मुसीबत, जञ्जाल, झञ्झट। इसी के साथ फ़ारसी का जान मिलकर ‘वबालेजान’ बना है; यानी प्राणों
पूरा पढ़ें...लेखक की चिन्ता इस बात की है कि भारतीय समाज-विज्ञान में विचारधाराओं का वर्चस्व रहा है, जिसके चलते राजनीति के
पूरा पढ़ें...दरअसल, हमारे रोज़मर्रा के आम व्यवहार में कोई परेशानी खड़ी नहीं होती, इसलिए हमें शायद भ्रष्ट हो रही भाषा का
पूरा पढ़ें...गान्धी के लिए स्वच्छता का मुद्दा कई अर्थों में आध्यात्मिक मसला भी था। भगवान से प्रेम के बाद वे स्वच्छता
पूरा पढ़ें...इसी देश में अँग्रेज़ी माध्यम के ऐसे विद्यालय खड़े हो रहे हैं, जहाँ हिन्दी बोलने पर अघोषित सेंसर है। ‘पापा-मम्मी’
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